कलम खामोश हो रहा है।

8 04 2011

कलम खामोश हो रहा है।
इस भागदौड़ भरी जिन्दगी में,
कलम खामोश हो रहा है।
चिंता नहीं मुझे किसी भी बात की,
फिर भी दिमाग है हरदम व्यस्त।
जिंदगी नये एहसासों में खो रहा है,
कलम खामोश हो रहा है।
नजदीक से देखा हमनें दुनिया को,
अब अपनी जगह खोजनी है मुझे।
चारो ओर सिर्फ टक्कर ही टक्कर है,
जिंदगी अनजाने प्रेमी के आगोश में सो रहा है।
कलम खामोश हो रहा है।
ऑखें रास्ता ढूॅढ रहा है,
अरमानों को जगने दिया है,
मस्ती मन सो रहा है।
कलम खामोश हो रहा है।
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2 responses

8 04 2011
Khan

veri nice yaar………………!!!!

12 03 2013
N.kr.Aasha

ना थकता ना हारता , मृत शरीर में भी जान ये डालता ! खामोश भले हो तेरी कलम, पर जन्नत की राह दिखाएगी कलम! (nice poem)

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