अनिश्चितताओं का खेल है जिन्दगी

8 01 2015

avi

हार-जित से तो यूँ हीं बदनाम है जिन्दगी

दरअसल, अनिश्चितताओं का खेल है जिन्दगी |

जब तक सांस है, तुझमे जद है,

सवार लो जिन्दगी |

न जाने कब शमशान हो जिन्दगी |

हँस लो, मुस्कुरा लो…..

ढूँढ लो हर ख़ुशी |

क्या पता कब खाक हो जिन्दगी |

क्या फ़कीरी, क्या अमीरी

क्या इबादत, क्या तिजारत,

मौत के घर बेजुबाँ है जिन्दगी |

नेक बन नेकी कर |

यहाँ न गैर न अपना कोई |

मत कर कोई अहं,

सोच भला, कर भला, बसुधैव कुटुम्बकम !

इंसान ही रहूँ न आये कभी दरिंदगी,

सुकून से मौत की बस है बंदगी |

कभी जश्न, कभी आह

कितने अक्स तेरी जिन्दगी !

वक़्त की जुबाँ,

वक़्त से ख़ामोश,

क्या अदा जिन्दगी !

हार-जित से तो यूँ हीं बदनाम है जिन्दगी

दरअसल, अनिश्चितताओं का खेल है जिन्दगी |

©अविनाश कुमार (ak25avi@gmail.com, 8051997288)

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