कुछ शेर ….बेपरवाह कलम से…..

30 03 2015

‘बेपरवाह’ धड़कने ठहर सी गयी है ,

जो मेरे कदमो की आहट उनके अहाते में हुई |

(C) अविनाश ‘बेपरवाह’

‘बेपरवाह’ नज़र से नज़र मत मिलाना,

नज़र जो लग गयी, नज़ारे बदल जायेंगे |

(C) अविनाश ‘बेपरवाह’

पूछा किसी ने ‘बेपरवाह’ मुस्कुराहटों का वजह तो बता दो,

मैंने कहा पराई ख़ुशी है, जिसकी हँसी में सब राज छुपा है|

(C) अविनाश ‘बेपरवाह’

‘बेपरवाह’ हुश्न से दूर रहना, इसके जलवे बहुत है,

आशियाँ उजरे बहुत है, रिश्ते बिखड़े बहुत हैं,

इतिहास पलट कर देखो, इसके बलवे बहुत हैं |

(C) अविनाश ‘बेपरवाह’

मासूमियत है ख़ामोश तस्वीर में | ‘बेपरवाह’ काशिस में मदहोश मत होना ,

होठों के चिलमन में हसीना अंगार लिए बैठी है |

(C) अविनाश ‘बेपरवाह’

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