बेपरवाह मैं बिंदास हूँ…..

15 09 2015

beparwah

कोई जख्म था दिल पर, अक्सर तकलीफ रहती थी.. फिर गुस्सा आया….दिल चिर लिया…यादों के धागों से रफ्फू किया….मरहम किया, पट्टी भी की….उस हसीं के कातिल नस्तर को, बाहर निकाल कर फेंक दिया…अब फिर से मेरा दिल जवां, पुराने नकली रकीब की फिक्र नहीं, किसी अतीत का जिक्र नहीं….अब बेपरवाह मैं बिंदास हूँ…..खुशियों का एक एहसास हूँ…..इश्क हूँ, अक्स हूँ, मर्ज हूँ, विश्वास हूँ… बेपरवाह मैं बिंदास हूँ ||

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